
बालोद : बालोद प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप, कहा – “संवाद की जगह दमन का रास्ता समाज को गृह युद्ध की ओर धकेल सकता है”
बालोद। जामड़ीपाट (पाटेश्वर धाम) से जुड़े विवाद को लेकर अब सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज होती जा रही हैं। इसी क्रम में जन मुक्ति मोर्चा ने आदिवासी समाज के समर्थन में खुलकर अपनी बात रखते हुए बालोद जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना की है।
जन मुक्ति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जीत गुहा नियोगी ने जारी बयान में कहा कि आदिवासी समाज अपने पुरखों, पेन शक्ति और पारंपरिक आस्था से जुड़े अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा रहा है। ऐसे समय में प्रशासन द्वारा चेतावनी, कानूनी कार्रवाई और दबाव की भाषा का इस्तेमाल किया जाना चिंता का विषय है।
मोर्चा ने आरोप लगाया कि यदि किसी संवेदनशील विषय पर संवाद, सहमति और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करने के बजाय भय और दमन का वातावरण बनाया जाएगा, तो इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है। बयान में कहा गया कि प्रशासन को ऐसे किसी भी कदम से बचना चाहिए, जिससे समाज में टकराव की स्थिति उत्पन्न हो।
जन मुक्ति मोर्चा ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक और समुदाय को अपनी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक आस्था के संरक्षण का अधिकार देता है। ऐसे में आदिवासी समाज की भावनाओं को समझने के बजाय उन्हें संदेह की दृष्टि से देखना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुकूल नहीं माना जा सकता।
मोर्चा ने जिला प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की दमनात्मक कार्रवाई के स्थान पर सभी पक्षों के साथ खुला संवाद स्थापित किया जाए तथा विवाद के समाधान के लिए शांतिपूर्ण और न्यायसंगत रास्ता अपनाया जाए।
साथ ही जन मुक्ति मोर्चा ने स्पष्ट किया कि वह आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, जल-जंगल-जमीन और पारंपरिक आस्था से जुड़े मुद्दों पर उनके साथ खड़ा है और किसी भी प्रकार के अन्याय या दमन का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करता रहेगा।
“जब संवाद के दरवाजे बंद होते हैं, तब संघर्ष के रास्ते खुलते हैं। इसलिए प्रशासन का दायित्व है कि वह समाज को जोड़ने का काम करे, तोड़ने का नहीं।”

