
छत्तीसगढ़ जंक्शनदिनांक : 16 जून 2026 विभाग ने माना, चांदी महंगी हुई तो बांट दिए नकली मंगलसूत्र मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना पर उठे गंभीर सवाल, गरीब बेटियों के सम्मान से समझौते का आरोपरायपुर। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत वितरित किए गए मंगलसूत्रों के नकली निकलने का मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।
मामले के सामने आने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्वीकार किया है कि चांदी के बढ़े हुए बाजार मूल्य के कारण कृत्रिम (नकली) मंगलसूत्र वितरित किए गए। विभाग की इस स्वीकारोक्ति ने योजना की पारदर्शिता, गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।जानकारी के अनुसार,
एमसीबी जिले के खड़गवां विकासखंड के चनवारीडांड में 10 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 184 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया था। विवाह के लगभग चार महीने बाद नवविवाहित महिलाओं ने शिकायत की कि उन्हें चांदी के नाम पर जो मंगलसूत्र दिए गए थे,
वे नकली निकले। शिकायतों के सार्वजनिक होने के बाद मामला तेजी से सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।विभागीय अधिकारियों ने अपनी सफाई में कहा कि चांदी के दामों में लगातार वृद्धि के कारण निर्धारित बजट में वास्तविक चांदी के मंगलसूत्र उपलब्ध कराना संभव नहीं था।
हालांकि आलोचकों का कहना है कि यदि लागत बढ़ रही थी तो सरकार के पास योजना की राशि में संशोधन, गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने या लाभार्थियों को वास्तविक स्थिति से अवगत कराने जैसे कई विकल्प मौजूद थे।मामले ने इसलिए भी गंभीर रूप ले लिया है क्योंकि यह केवल एक आभूषण का प्रश्न नहीं, बल्कि उन गरीब परिवारों के विश्वास और सम्मान का सवाल है जिनके लिए यह योजना संचालित की जाती है।
विवाह जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर दिया गया मंगलसूत्र केवल एक वस्तु नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक प्रतीक माना जाता है।विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरा है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि योजनाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता से समझौता किया जाएगा तो जनकल्याणकारी योजनाओं पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा।
