
बिलासपुर सेंट्रल जेल में खून से सना सवाल:मानसिक रोगी बैरक में हत्या, आखिर जेल की सुरक्षा सो रही थी या सिस्टम?छत्तीसगढ़ जंक्शनखास रिपोर्ट : विनोद नेताम की कलम से…बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर सेंट्रल जेल से मंगलवार सुबह एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई, जिसने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। जानकारी के अनुसार जेल के भीतर बंद एक कैदी ने दूसरे कैदी पर नाली के स्लैब से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल कैदी को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।यह घटना केवल दो कैदियों के बीच की हिंसा नहीं है, बल्कि जेल की उस व्यवस्था पर करारा तमाचा है, जिसे “सुरक्षा” के नाम पर हाई सिक्योरिटी का दावा करते नहीं थकते जिम्मेदार अधिकारी।दुष्कर्म मामले में बंद था मृतकमृतक की पहचान नीलू जगत, उम्र करीब 27 वर्ष, निवासी दवनपुर थाना कोटा के रूप में बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार नीलू साल 2024 से नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में जेल में बंद था। वहीं हत्या का आरोपी राजेश राय, उम्र करीब 40 वर्ष, निवासी चमारी गांव, मुंगेली जिला बताया जा रहा है, जो तिहरे हत्याकांड के मामले में करीब 17 वर्षों से उम्रकैद की सजा काट रहा है।बताया जा रहा है कि आरोपी राजेश राय ने सजा में राहत और रिहाई के लिए माफी की अर्जी लगाई थी, लेकिन अर्जी खारिज हो गई। इसी मामले में उसके भाई सुरेश राय को वर्ष 2025 में माफी देकर रिहा कर दिया गया था। भाई की रिहाई और अपनी अर्जी खारिज होने के बाद आरोपी मानसिक तनाव में था और कथित रूप से अजीब हरकतें भी कर रहा था।सुबह 9:25 बजे जेल के भीतर मचा खूनी हड़कंपप्राप्त जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह करीब 9:25 बजे जेल के भीतर आरोपी राजेश राय ने अचानक नीलू जगत पर हमला कर दिया। आरोप है कि उसने नाली के स्लैब से नीलू के सिर पर लगातार चार से पांच बार वार किया। हमले में नीलू गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा।आस-पास मौजूद अन्य बंदियों ने किसी तरह आरोपी को रोका और घायल कैदी को बचाने की कोशिश की। इसके बाद जेल स्टाफ और पुलिसकर्मियों ने नीलू को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन दोपहर करीब 12:30 बजे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।मानसिक रोगियों की बैरक में हुई वारदात, सवाल और गंभीरसबसे बड़ा सवाल यह है कि यह घटना जेल के ई-1 वार्ड में हुई, जिसे मानसिक रूप से बीमार या मानसिक समस्याओं से जूझ रहे बंदियों के लिए आरक्षित बताया जा रहा है। यदि आरोपी पहले से मानसिक तनाव में था, तो उसके व्यवहार पर निगरानी क्यों नहीं रखी गई? यदि बैरक संवेदनशील थी, तो वहां ऐसी वस्तु कैसे उपलब्ध रही, जिससे किसी की जान ली जा सके?जेल के भीतर नाली का स्लैब हथियार बन गया और प्रशासन को खबर तब लगी जब एक कैदी खून से लथपथ हो चुका था। यह लापरवाही नहीं तो और क्या है?हाई सिक्योरिटी जेल में हत्या, सिस्टम कटघरे मेंसेंट्रल जेल जैसी उच्च सुरक्षा वाली जगह में एक कैदी का दूसरे कैदी पर जानलेवा हमला कर देना अपने आप में बेहद गंभीर मामला है। जेल की चारदीवारी के भीतर कैदी प्रशासन की निगरानी में रहते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि हमले के वक्त ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी कहां थे? मानसिक रोगी बैरक की निगरानी कौन कर रहा था? क्या आरोपी के मानसिक तनाव की जानकारी जेल प्रशासन को थी? और यदि थी, तो उसे संभालने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?जेल के भीतर हुई यह हत्या बताती है कि सलाखों के पीछे भी सुरक्षा व्यवस्था कागजों में ज्यादा और जमीन पर कम नजर आ रही है।जांच शुरू, लेकिन जवाब कौन देगा?घटना की सूचना मिलते ही जेल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जेल अधीक्षक का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ जांच रिपोर्ट से एक कैदी की मौत का हिसाब पूरा हो जाएगा? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी? या फिर हमेशा की तरह फाइल खुलेगी, बयान होंगे, जांच बैठेगी और मामला धीरे-धीरे सरकारी धूल में दब जाएगा?जेल के भीतर मौत, बाहर सिस्टम की खामोशीयह वारदात छत्तीसगढ़ की जेल व्यवस्था को आईना दिखा रही है। अपराधी चाहे जिस मामले में बंद हो, जेल प्रशासन की हिरासत में उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की ही होती है। अगर जेल के भीतर भी बंदी सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर सुरक्षा व्यवस्था के दावों का मतलब क्या रह जाता है?बिलासपुर सेंट्रल जेल की यह घटना केवल हत्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की नाकामी का खूनी दस्तावेज है। अब देखना यह होगा कि सरकार और जेल प्रशासन इस मामले में सचमुच कड़ी कार्रवाई करते हैं या फिर “जांच जारी है” का पुराना राग अलापकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।
