बिलासपुर में कागजी किसानों पर सख्ती, घर-घर जांच करेंगे

बिलासपुर में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार खाद्य विभाग को शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ बिचौलिए और ‘कागजी किसान’ दूसरे का धान अपने नाम से खपाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद राजस्व, कृषि और सहकारिता विभाग की संयुक्त टीम गठित की गई है, जो किसानों के घर जाकर धान की वास्तविक उपलब्धता की जांच करेगी।

प्रशासन का उद्देश्य यह है कि वास्तविक किसान को उसका हक मिले और फर्जी तरीके से धान बेचने वालों पर रोक लगाई जा सके। अक्सर आरोप लगते हैं कि छोटे किसानों से कम दाम में धान खरीदकर बिचौलिए उसे पंजीयन के जरिए समर्थन मूल्य पर बेचने की कोशिश करते हैं। इससे सरकारी योजना का फायदा असली किसान के बजाय गलत लोगों तक पहुंच जाता है।

अब अधिकारी दफ्तरों में बैठकर कागज देखने के बजाय सीधे गांव और किसानों के घर पहुंचकर धान की मात्रा, रकबा और उत्पादन की स्थिति का मिलान करेंगे। अगर रिकॉर्ड में रकबा अधिक है लेकिन घर में धान उपलब्ध नहीं है, तो ऐसे मामलों को संदिग्ध माना जा सकता है।रिपोर्ट के अनुसार जिले की 11 तहसीलों में संयुक्त टीमों को जिम्मेदारी दी गई है।

जांच में वास्तविक किसानों को परेशान न करने और गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई करने की बात कही गई है।धान खरीदी छत्तीसगढ़ की सबसे संवेदनशील और बड़े आर्थिक महत्व वाली प्रक्रिया है। इसमें पारदर्शिता जरूरी है, क्योंकि यह सीधे किसान, सरकारी धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा मामला है।बिलासपुर प्रशासन की यह पहल अगर ईमानदारी से लागू होती है, तो बिचौलियों के नेटवर्क पर रोक लग सकती है और असली किसानों को राहत मिल सकती है।

अब देखना होगा कि यह जांच केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहती है या जमीन पर सचमुच असर दिखाती है।

Related Posts

जेल में खून से सना सवाल

बिलासपुर सेंट्रल जेल में खून से सना सवाल:मानसिक रोगी बैरक में हत्या, आखिर जेल की सुरक्षा सो रही थी या सिस्टम?छत्तीसगढ़ जंक्शनखास रिपोर्ट : विनोद नेताम की कलम से…बिलासपुर। छत्तीसगढ़…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *